4 प्रसंग
प्रतापी आल्हा और ऊदल
यह कहानी महोबा के चंदेल राजवंश के वीर सेनापति और रक्षक, आल्हा और ऊदल की अद्भुत वीरता और स्वामी-भक्ति को समर्पित है। पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष से लेकर उनके जीवन के ५२ प्रसिद्ध युद्धों की गाथा इस विवरण में शामिल है। सन १९३७ की मूल ऐतिहासिक पुस्तक पर आधारित यह लेख बुंदेलखंड के लोक-साहित्य और उनके अदम्य साहस को पाठकों के सामने लाता है।