आल्हा-खण्ड: 23 मैदान 52 लड़ाई
पं० ललिताप्रसाद मिश्र द्वारा संकलित बुंदेलखंड का अमर वीर रस महाकाव्य 'आल्हा-खण्ड'। इसमें महाभारत कालीन योद्धाओं के कलयुग में पुनर्जन्म लेकर लड़ी गई 52 ऐतिहासिक लड़ाइयों और 23 युद्ध मैदानों का ओजस्वी वर्णन है। इस कथा श्रृंखला में बनाफर वीरों—आल्हा, ऊदल, मलखान, लाखन और राजा परमाल के शौर्य और पराक्रम की संपूर्ण कथा को हिंदी गद्य में प्रस्तुत किया गया है।
प्रसंग सूची (Table of Contents)
भूमिका — कलियुग में महाभारत के वीरों का पुनर्जन्म
महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों की युद्ध-पिपासा और भगवान श्रीकृष्ण का वरदान, जिसके फलस्वरूप महाभारत के वीरों ने कलियुग में आल्हा-ऊदल और अन्य वीरों के रूप में पुनर्जन्म लिया।
परिमाल राय का विवाह
मल्हना से विवाह की इच्छा लेकर परिमाल राय विशाल चंदेली बारात के साथ महोबा पहुँचते हैं। विवाह का प्रस्ताव ठुकराए जाने पर शुरू होता है भयंकर संघर्ष, जिसमें परिमाल की वीरता के सामने माहिल और भोपति तक बंदी हो जाते हैं।
दस्सराज और बच्छराज की कहानी
आल्हा और ऊदल के पिता दस्सराज और चाचा बच्छराज के जन्म की प्रामाणिक कथा। जानिए कैसे गुरु गोरखनाथ के शिष्यों सल्ल-वल्ल ने पूर्वजन्म के संकल्प, भगवान शिव-पार्वती के वरदान और राजा परिमाल के सहयोग से महोबा में वीर बनाफर वंश की नींव रखी।
संयोगिता स्वयंवर और कन्नौज की लड़ाई | जयचंद vs पृथ्वीराज
संयोगिता स्वयंवर से शुरू हुई यह प्रसिद्ध वीरगाथा कन्नौज की भीषण लड़ाई तक पहुँचती है। पृथ्वीराज चौहान, संयोगिता और राजा जयचंद के बीच संघर्ष में अनेक वीर योद्धा रणभूमि में उतरते हैं और अंततः संयोगिता का डोला दिल्ली पहुँचता है।